धुआँ सा ही सही है जोश अब भी कुछरहा बाक़ी है मुझ में होश अब भी कुछमिलन की आस आँखों में बसा कर वोकहे क्या है बचा तन-गोश अब भी कुछ— Karal 'Maahi'