ला-मुतमइन है वो जिसे दिल खोल कर मिला'माही' कहे सुनो है कोई हुन सा बद-नसीबबैठे बिठाए दिल ही ने यक-दम कहा मुझे'माही' ग़ज़ल का क़ाफ़िया तू चुन सा बद-नसीब— Karal 'Maahi'