हाथों का ढूँढ़ता रहा तक़दीर देर तकदिल देखता रहा तेरी तस्वीर देर तकतुझ से जुदा हुआ तो दिवाने की रह गईआँखों में इंतिज़ार की ज़ंजीर देर तकसारे जहाँ में गूँजी थी आवाज़ इश्क़ कीराँझा पुकारता रहा जब हीर देर तक— Kartik Bhalerao " Asad "