तलाशी के नतीजों से ये चेहरा सूख जाता है

मैं मंज़िल तक पहुँचता हूँ तो दरिया सूख जाता है

भला मेरी मोहब्बत से किसी का हो नहीं सकता
मैं जिस पौधे को दूँ पानी वो पौधा सूख जाता है

दर-ओ-दीवार तो घर के अभी मज़बूत हैं लेकिन
कभी तूफ़ान आए तो कलेजा सूख जाता है

मेरी गुड़िया की पेशानी घर आ कर चूम लेते ही
मेरे दिन भर की मेहनत का पसीना सूख जाता है

ज़रूरी तो नहीं हर शख़्स मारा हो मोहब्बत का
किसी का भूख के मारे भी चेहरा सूख जाता है

कड़कती धूप में माँ-बाप का साया ज़रूरी है
अगर साया न हो सर पर तो बच्चा सूख जाता है

— Kartik Bhalerao " Asad "

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