दग़ा खाकर मेरा ये दिल बड़ा उस्ताद निकला है
वगरना इश्क़ से कब आदमी आबाद निकला है
ये तो कहने की बातें थी कि मेरी जान उसकी है
वो पागल सच समझ बैठा वो तो जल्लाद निकला है
तेरे पहले जो घर आया वो भटका इक मुसाफ़िर था
तेरी ख़ुशबू गया लेकर जो तेरे बाद निकला है
सुना है एक शीरीं ने कल अपनी जान दे दी है
सुना है शहर में आज इक नया फ़रहाद निकला है
ख़ुशी का दिन है यारों जो सभी बनने लगे काफ़िर
ज़मीं के क़ैदखानों से ख़ुदा आज़ाद निकला है
कहा था सुन ले बेटी की वो तेरा ख़ून है आख़िर
तेरी बेटी का क़ातिल तो तेरा दामाद निकला है
तू जिसको दिल समझता था हक़ीक़त में वो पत्थर था
तू पत्थर से जो है निकला तो अब फ़ौलाद निकला है
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