dagaa khaakar meraa ye dil badaa ustaad niklaa hai | दग़ा खाकर मेरा ये दिल बड़ा उस्ताद निकला है

  - Kinshu Sinha

दग़ा खाकर मेरा ये दिल बड़ा उस्ताद निकला है
वगरना इश्क़ से कब आदमी आबाद निकला है

ये तो कहने की बातें थी कि मेरी जान उसकी है
वो पागल सच समझ बैठा वो तो जल्लाद निकला है

तेरे पहले जो घर आया वो भटका इक मुसाफ़िर था
तेरी ख़ुशबू गया लेकर जो तेरे बाद निकला है

सुना है एक शीरीं ने कल अपनी जान दे दी है
सुना है शहर में आज इक नया फ़रहाद निकला है

ख़ुशी का दिन है यारों जो सभी बनने लगे काफ़िर
ज़मीं के क़ैदखानों से ख़ुदा आज़ाद निकला है

कहा था सुन ले बेटी की वो तेरा ख़ून है आख़िर
तेरी बेटी का क़ातिल तो तेरा दामाद निकला है

तू जिसको दिल समझता था हक़ीक़त में वो पत्थर था
तू पत्थर से जो है निकला तो अब फ़ौलाद निकला है

  - Kinshu Sinha

Aashiq Shayari

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