samajhna badaa aasaan hai zindagi ko | समझना बड़ा आसाँ है ज़िन्दगी को

  - Kinshu Sinha

समझना बड़ा आसाँ है ज़िन्दगी को
ख़ता हो किसी की, सज़ा दो किसी को

है ख़ूबी कि हर कोई मेरा ख़ुदा है
कभी आज़मा लो मेरी मुफ़्लिसी को

मिलें जिस सेे, उस सेे ज़रा इश्क़ कर लें
कभी शौक़ ऐसा भी था आदमी को

बहुत सारे दिल तोड़े तब जाके जाना
वही शख़्स बस चाहिए दिल-लगी को

यहाँ हर किसी की अलग दास्ताँ है
बुरा मत कहो तुम किसी शा'इरी को

ख़ता एक ही घर ने की है तो आख़िर
गुनहगार क्यूँ कहना सारी गली को

यहाँ ‘किंशु’ हर चीज़ तन्हा है इतनी
बसेरा अलग चाहिए रोशनी को

  - Kinshu Sinha

Ulfat Shayari

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