hai khizaan ya bahaar vo ladki | है ख़िज़ाँ या बहार वो लड़की

  - Kinshu Sinha

है ख़िज़ाँ या बहार वो लड़की
या है इन सबके पार वो लड़की

शब चमकती है उसकी बातों से
बिजली की एक तार वो लड़की

उसको भी इंकलाब लाना है
है बहुत शानदार वो लड़की

ऐसा लगता है कबसे मेरा ही
करती है इंतज़ार वो लड़की

मैं नहीं कहता क़ीमती हूँ मैं
कहती है बार बार वो लड़की

सिर्फ़ मैं ही नहीं फ़िदा उसपे
हर जहाँ की पुकार वो लड़की

वो मुझे होशियार कहती है
है बहुत होशियार वो लड़की

इक तो दिल्ली है दूर काफ़ी और
मिलने को बेक़रार वो लड़की

एक पल बर्फ़ सी है, अगले पल
एक सौ दो बुखार वो लड़की

जाम पीना है उसको मेरे संग
करती है ऐतबार वो लड़की

रब्त बेनाम ठीक तो है पर
सच कहूँ तो है प्यार वो लड़की

  - Kinshu Sinha

Baaten Shayari

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