sadaqat ki ibadat men bagaavat kar | सदाक़त की इबादत में, बग़ावत कर

  - Kinshu Sinha

सदाक़त की इबादत में, बग़ावत कर
मुहब्बत की हिफ़ाज़त में, बग़ावत कर

शिकायत को समय दुनिया नहीं देगी
असर है बस बग़ावत में, बग़ावत कर

न काफ़िर है न दुनिया में ख़ुदा कोई
मरेंगे सब जहालत में, बग़ावत कर

कनीज़ों से गले मिल, उनके आँसू पोंछ
कमी कर दे रिवायत में, बग़ावत कर

कोई इल्ज़ाम आए तेरे सर झूठा
खड़ा हो जा वकालत में, बग़ावत कर

वही चाहत जिसे दुनिया ने है छीना
उसी चाहत की चाहत में, बग़ावत कर

तेरा मज़हब जो है, इक पिंजरा ही है
सुकूँ है बस ज़मानत में, बग़ावत कर

हैं आँखें बीस तेरे नाम के ऊपर
बहुत है भार इज़्ज़त में, बग़ावत कर

जिसे ‛हाँ’ करता था, बिल्कुल ‛न’ कर दे अब
सभी को डाल हैरत में, बग़ावत कर

  - Kinshu Sinha

Peace Shayari

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