यूँँ देखिए तो आँधी में बस इक शजर गयालेकिन न जाने कितने परिंदों का घर गयाजैसे ग़लत पते पे चला आए कोई शख़्ससुख ऐसे मेरे दर पे रुका और गुज़र गया— Rajesh Reddy