किसी ग़म को मिटाना ही तो था जानाँ
सदा मुझको लगाना ही तो था जानाँ
हमारे बीच में कोई ख़ुदा था क्या
खड़ा केवल ज़माना ही तो था जानाँ
मुहब्बत हो चुकी थी वादे भी थे ही
तुम्हें उनको निभाना ही तो था जानाँ
उसी इक राह में तो मुंतज़िर थे हम
तुम्हें उस राह आना ही तो था जानाँ
हमें जैसे भुलाया तुमने, वैसे ही
किसी और को भुलाना ही तो था जानाँ
तुम्हारी याद इतनी आ रही है क्यूँ
वो सब कोई फ़साना ही तो था जानाँ
मुहब्बत में सज़ा-ए-मौत तो तय थी
तेरा दिल क़ैदखाना ही तो था जानाँ
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