उदासी हर तरफ़ छाने लगी है
मुझे तू याद फिर आने लगी है
अभी तो होश में आ ही रहा था
हवा फिर मुझको बहलाने लगी है
कहा है नासमझ मुझको ही उसने
मुझे ही फिर वो समझाने लगी है
तरीक़ा और नहीं सूझा कोई तो
मेरी झूठी क़सम खाने लगी है
गई वो तो लगा, परछाई मेरी
मुझे ही छोड़ कर जाने लगी है
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