कोई यूँँ प्यार में जब फूल दे अच्छा नहीं लगता

जुदा हो फूल अपनी डाल से अच्छा नहीं लगता

मेरे यारा नहीं हो सकते दीया और बाती हम
अकेले बाती का जलना मुझे अच्छा नहीं लगता

कि मिलना या नहीं मिलना वो रस्मन पूछ लेती है
फिर इस के बा'द तो मिलना किसे अच्छा नहीं लगता

वहाँ मैं सुब्ह जा बैठा बुलाया शाम को लेकिन
सुना था देर से आना उसे अच्छा नहीं लगता

बता तू क्या करेगा गर वो थोड़ी देर से आए
किसी से रूठना भी तो तुझे अच्छा नहीं लगता

— Krishnakant Kabk

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