अब इश्क़ की ऐसी कहानी होती है
वो बोले तो दाढ़ी बढ़ानी होती है
बालों की लट में भी तो है मेहनत बहुत
पहले गिरा के फिर उठानी होती है
लहजा समझ कर वो इरादे जानती
हर लड़की इतनी तो सयानी होती है
हर लड़की डिस्को पे नहीं होती फ़िदा
कुछ तो ग़ज़ल की भी दिवानी होती है
अब की मोहब्बत क्या मोहब्बत है भला
असली मोहब्बत तो पुरानी होती है
— Krishnakant Kabk















