सैकेंडरी है बात कि आदम ख़राब है
प्रायोरिटी में ये है कि सिस्टम ख़राब है
अब आदमी कोई भी मुक़म्मल भला नहीं
अच्छों में है शुमार जो कुछ कम ख़राब है
सोसायटी को अच्छा बनाना है तो कहो
काग़ज़ में जाति धर्म का कॉलम ख़राब है
बाहरस हष्ट-पुष्ट है अंदर से खोखला
न्यूँ एज के समाज का कस्टम ख़राब है
म्यूजिक से दूर दूर तलक है न वास्ता
सिंगर से बोलता है कि सरगम ख़राब है
— Kumar Kaushal














