KUNAL
KUNAL
Ghazal

राहें जुदा हो जाएँगी सोचा न था

पर साथ चलने लाइक़ अब रस्ता न था

अच्छा किया जो खेल कर तोड़ा इसे
यूँ भी दिल अपने काम कुछ आता न था

हम अजनबी बन कर मिले अब के बरस
हालाँकि गुज़रे साल तक ऐसा न था

अब चीर कर सीना दिखाने से रहे
तुम मान लो दिल में कोई रहता न था

उस रास्ते पर मैं खड़ा था रात तक
वो रास्ता जो शाम की बस का न था

— KUNAL

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