वो जब बंद कमरे में लटका हुआ था ये किस को पता था
खिलाड़ी मोहब्बत में बिल्कुल नया था ये किस को पता था
कि उन जाहिलों ने उसे आदमी की तरह भी न रक्खा
मैं बचपन से जिस शख़्स को पूजता था ये किस को पता था
मैं जब तक उसे जीत लेने की तैयारियाँ कर रहा था
वो तब तक किसी और का हो चुका था ये किस को पता था
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