
भुला देना ही बेहतर है ग़लत बातों को जीवन में
बड़े बेचैन रहते हैं जो सब कुछ याद रखते हैं
नहीं मरते जो तानों से वो हम आज़ाद पंछी हैं
गुज़ारी उमर जिस वन में उसे आबाद रखते हैं
— Kushal "PARINDA"
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