ज़माने ने मुझे अब तक बड़ी आफ़त में डाला है
वो मेरा बाप बस जिसने मुझे राहत में डाला है
परेशानी तो है उसको के मैं अब लौट आया हूँ
हूँ ज़िन्दा मैं उसे इस सोच ने ज़हमत में डाला है
ग़मों की बारिशों में मैं हमेशा खुम बना उसका
मेरी इस बात ने उसको मेरी हसरत में डाला है
फ़क़ीरों सी हुई हालत मगर फिर भी चला हूँ मैं
वो सौदेदार है जिसने मुझे फ़ुर्क़त में डाला है
नशे में झूमता हूँ मैं उसे अब भूल जाने को
उतर जाए नशा उस का नशा चाहत में डाला है
न शिकवा कर शिकायत कर भरी महफ़िल में साकी की
यही ग़लती के लोगों ने हमें तुर्बत में डाला है।
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