सभी की आँख में रुसवाइयों का शहर है
इन्हीं के बीच में कुछ शाइरों का शहर है
छुपाएगा भी कैसे राज़ दुनिया से कोई
पस-ए-दीवार अब इक आइनों का शहर है
हमें अब डूबने का डर नहीं कोई भी दोस्त
सुना है इस नदी में मछलियों का शहर है
हमारे हाथ में कुछ इस लिए हैं आबले
हमारा शहर अब इक मेहनतों का शहर है
— Harsh Kumar Bhatnagar















