ग़ैर को भी यार ही कहा अदू नहीं कहाशे'र जैसा भी हो मेरा फ़ालतू नहीं कहादूर हो के भी तुम्हारा मान रखता हूँ सदामैं ने आज तक कभी भी तुम को तू नहीं कहा— Harsh Kumar Bhatnagar