main hoon qaid kisi tahkhaane men | मैं हूँ क़ैद किसी तहखाने में

  - Kabir Altamash

मैं हूँ क़ैद किसी तहखाने में
देर लगेगी मुझको आने में

रोना मुझको है बस एक वहीं
हाँ हाँ बस उसके ही शाने में

यार अभी मैं शायर अदना हूँ
वक़्त लगेगा मुझको छाने में

नाम लिखा है खाने वालों का
खाने के हर दाने दाने में

मेरा मन है उसको खोने का
क्या रक्खा है उसको पाने में

तुम सब भी कंधा बदलोगे ही
मेरी मय्यत को ले जाने में

देखो मैं अब किसका होता हूँ
बस दो ही लड़की है ज़माने में

हंसती है वो मेरे हंसने से
रो पड़ता हूँ उसको हंसाने में

मेरी ऐसी हालत है, पहले
आंसू पीना पड़ता कुछ खाने में

  - Kabir Altamash

Shaayar Shayari

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