khoob saal-e-nau manana dost mil ke | ख़ूब साल-ए-नौ मनाना दोस्त मिल के

  - Manohar Shimpi

ख़ूब साल-ए-नौ मनाना दोस्त मिल के
रंजिशें सारी भुलाना दोस्त मिल के

एक दुनिया दोस्तों की भी रहे हैं
राज़ दिल के फिर बताना दोस्त मिल के

कोई क़िस्सा जो अधूरा ही रहा हो
याद से सब को सुनाना दोस्त मिल के

साथ कब जश्न-ए-चराग़ाँ सब मनाते
ये तक़ाज़ा है बताना दोस्त मिल के

दूरियाँ होली मिटाती इसलिए ही
जश्न रंगों का मनाना दोस्त मिल के

रात की बज़्म-ए-तरब क्या ख़ूब ही थी
और इक महफ़िल जमाना दोस्त मिल के

सिलवटें चेहरे बयाँ करती 'मनोहर'
अस्लियत उस की बताना दोस्त मिल के

  - Manohar Shimpi

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