साथ साया रहा जो दिखा ही नहीं
जुस्तजू के सिवा कुछ पता ही नहीं
वास्ता था कभी उस से गहरा मगर
दोस्त हो के मुझे वो मिला ही नहीं
गुफ़्तुगू की बहुत ख़ूब कोशिश हुई
हल न हो ऐसा तो मसअला ही नहीं
जंग के पैतरों से अदू दूर था
इस लिए बे-ख़बर को पता ही नहीं
सच में सब से हसीं थी वो कॉलेज में
फिर भी उस से मेरा दिल लगा ही नहीं
क्या कहें आशिक़ों से मनोहर अभी
रास्ता दिल-लगी का दिखा ही नहीं
— Manohar Shimpi















