
इज़्ज़त से जब भी मुझ को पुकारा नहीं गया
मैं मुड़के उस गली में दुबारा नहीं गया
उस से कहा था ख़ौफ़ में मुझ पर यक़ीन कर
फिर मुझ से उस का ख़ौफ़ उतारा नहीं गया
— Mayank Tiwari
Other sher from the same pen
Shers of self respect.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling