तिरी इक मुलाक़ात से भर गया दिलतुझे ज़िंदगी भर मिलेंगे नहीं हममुनासिब नहीं अब हमारा लगे दिलकिसी शख़्स पर अब मरेंगे नहीं हम— Manish watan