ता-क़यामत इश्क़ की जादूगरी जारी रहे
उस की सूरत इन निगाहों में सदा ठहरी रहे
ज़िंदगी भर पास उस के मैं रहूँ कुछ इस तरह
जिस तरह से इक हिरन के पास कस्तूरी रहे
जिस्म पर पोशाक सादी मैं पहन लूँगी मगर
शॉल पर उस के मेरे हाथों की गुलकारी रहे
उस के बिन भारी लगे दिन की गुज़रती हर घड़ी
और तन्हा रात मेरी जान की बैरी रहे
हाए पूरे चाँद की ये रात क्यूँ उस के बिना
चाँदनी तन मन जलाने के लिए बिखरी रहे
शम्स मेरे साथ डूबे वादियों में प्यार की
इस तमन्ना में सलोनी शाम सिंदूरी रहे
ये मुहब्बत से भरी उस की नज़र मुझ पर सदा
रात में शबनम सी दिन में धूप सी बिखरी रहे
— Meenakshi Masoom















