हिज्र को ज़िंदगी की तरह मैंकाटता हूँ सभी की तरह मैंएक तिनका नहीं पास लेकिनखिल रहा हूँ हँसी की तरह मैंकिस तरह छोड़ दूँ याद करनायार उस को उसी की तरह मैंएक मुद्दत से हूँ ख़ुद से 'अंकुर'राब्ते में किसी की तरह मैं— Ankur Mishra