इक दफ़ा भी हम ख़ुशी सेमिल न पाए ज़िंदगी सेलौटते हैं रोज़ तन्हाअश्क यादों की गली सेराब्तों के इस सफ़र मेंदूर हैं कितने सभी से— Ankur Mishra