उम्र भर ख़ुद से दग़ा करता रहाबस यही इक मैं ख़ता करता रहाजिन लकीरों में न थी तेरी सदाउन लकीरों से गिला करता रहापास दरिया था मिरे लेकिन बशरबहते अश्कों से वफ़ा करता रहा— Ankur Mishra