
बड़ी उलझन थी जीवन में बहुत गहरा अँधेरा था
तेरे क़दमों में जब सोया बड़ा दिलकश सवेरा था
मुझे यूँ कामयाबी की ज़मानत मिल गई घर से
निकलते वक़्त मेरे सर पे माँ ने हाथ फेरा था
— Mohd Ashahad
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