ख़ुशी जब आ ठहरती है मेरे ग़म के मुहाने पर
भटक जाता हूँ अक्सर रास्ते से मुस्कुराने पर
यही सब सोच कर तो हाथ मेरे काँप जाते हैं
करूँगा क्या लगेगा तीर जब मेरा निशाने पर
किसी की याद मुझ को आप का चेहरा दिलाता है
निहारा आप को मैं ने किसी की याद आने पर
तुम्हारे बा'द मेरे पास है ही क्या सिवाए ग़म
बताऊँ क्यूँ तुम्हें भी वो जो घट जाए बताने पर
यहाँ महफ़िल में इतने लोग हैं पर तू बता 'मोहित'
ख़ुशी थी किस के आने की दुखी हैं किस के जाने पर
— Mohit Dixit















