जाने कैसे कब मिल जाते
लब से आ कर लब मिल जाते
कभी न मिलते आँखों देखे
मन से देखे रब मिल जाते
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
इक दिन सब मज़हब मिल जाते
गज़लें कहने को मुझ को भी
लहजे और अदब मिल जाते
अजब ग़ज़ब है भूले भटके
लड़ते लड़ते सब मिल जाते
— Mrkknathji
लब से आ कर लब मिल जाते
कभी न मिलते आँखों देखे
मन से देखे रब मिल जाते
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
इक दिन सब मज़हब मिल जाते
गज़लें कहने को मुझ को भी
लहजे और अदब मिल जाते
अजब ग़ज़ब है भूले भटके
लड़ते लड़ते सब मिल जाते
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