ज़माने भर में फैली है वफादारी हमारीभला कैसे छिपेगी जान ये यारी हमारीपता चलता है हँसने से अधूरे हम बहुत हैंचलेगी अब नहीं ज़्यादा अदाकारी हमारी— Murari Mandal