hamaara dil jab nahin laga to sawaal paida hua lagega | हमारा दिल जब नहीं लगा तो सवाल पैदा हुआ लगेगा

  - Muzdum Khan

हमारा दिल जब नहीं लगा तो सवाल पैदा हुआ लगेगा
जवाब में हमनें कह दिया ठीक है मगर और क्या लगेगा


गर कभी तीर चूम कर वो मेरी तरफ़ छोड़ दे कमां से
मेरा मुक़द्दर तो इस तरह का है तीर दुश्मन को जा लगेगा

कि दोस्त ऐसे मुआशरे में मुआशका चाहते हैं मुझ सेे
मैं जिस
में थप्पड़ भी खाना चाहूँ तो वो भी बुर्के में आ लगेगा

हमारा नक़्शा किराया मेहनत दिमाग लगता है रास्तों पर
तुम्हारी तो इनसे दोस्ती है तुम्हारा तो शुक्रिया लगेगा

मुशायरों में ग़ज़ल नहीं लोग सिर्फ हुलियों को देखते हैं
मेरा भी एक दोस्त है जो हँसने के बाद जॉन एलिया लगेगा

  - Muzdum Khan

Dushmani Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Muzdum Khan

As you were reading Shayari by Muzdum Khan

Similar Writers

our suggestion based on Muzdum Khan

Similar Moods

As you were reading Dushmani Shayari Shayari