मिरे हर लफ़्ज़ में शामिल कहीं कोई कहानी है

कहानी भी वही है जो कई सदियों पुरानी है

मैं आया हूँ सितारों के परे से दास्ताँ ले कर
यही इक दास्ताँ मुझ को सितारों को सुनानी है

अधूरी बात को कहते हुए जो मर गया था मैं
मुझे मरने से पहले बात वो पूरी बतानी है

यहाँ फिरना वहाँ फिरना दिल-ए-नादान की ख़ातिर
मुझे अब बोझ लगती है कि जो मेरी जवानी है

मुझे चारों तरफ़ से घेरकर बंधक बनाया है
कभी लगता है जैसे ग़म ये सारा आसमानी है

मिरे माथे की जो इन सलवटों को देखते हो तुम
ये मुझ पे वक़्त की छोड़ी गई कोई निशानी है

— nakul kumar

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