दर्द में रहती है ग़म को आज़माती हैज़िंदगी कुछ गीत भी यूँ गुनगुनाती हैये उधारी का सफ़र है इस ज़माने मेंइक न इक दिन मौत फिर सब को बुलाती है— nakul kumar