
पीपल बरगद नीम यहाँ पर छाँव ढूॅंढ़ने आते हैं
बूढ़े होते नगर यहाँ पर गाँव ढूॅंढ़ने आते हैं
चलते-चलते थकने वाले लोग यहाँ पर आख़िर में
मेरे इन क़दमों में अपने पाँव ढूॅंढ़ने आते हैं
— nakul kumar
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