दिलों के ये रिश्ते निभाएँ तो कैसेख़ुशी को भी ग़म में जताएँ तो कैसेयहाँ मुफ़लिसी के सताये हैं हम भीयूँ सपने भी मन में सजाएँ तो कैसे— Naviii dar b dar