मारे वहशत के ये तस्वीर बना बैठे हैं
अपने ही पाँव में ज़ंजीर बना बैठे हैं
दिल बनाने को कहा था कभी उसने लेकिन
हम भी नादान फ़क़त तीर बना बैठे हैं
अब मिरा प्रश्न है दुख कौन बनाता है?
लाज़मी है वो जो *शमशीर बना बैठे हैं!
*शमशीर- तलवार
आप के जैसे बनाते हैं नमी आँखों में
मेरे जैसे सभी *नम-गीर बना बैठे हैं
*नमी सोखने वाला
उनसे पूछे कोई ग़म अस्ल में होता क्या है
दिल की दुनिया को जो कश्मीर बना बैठे हैं
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