ha | हमें भी करदे इस ज़िद से रिहा तू

  - Nikunj Rana

हमें भी करदे इस ज़िद से रिहा तू
ज़रा मिल करदे बस ख़ुद से जुदा तू

दवा तो बस दवा है जाम कम है
लबों पे लब रखे करदे फ़ना तू

लबों से हम भी कुछ ज़्यादा न बोले
कहीं पूछ ले न इस दिल की रज़ा तू

सफ़र में अंत तक तेरे रहें हम
नहीं समझा अभी तक ये वफ़ा तू

हुआ जो भी हुआ बस इक दुआ हैं
रहे तू भी जहाँ ख़ुश रह सदा तू

'निकुँज' क्या शय थी जो न थी मुकम्मल
मोहब्बत को बना बैठा है ख़ुदा तू

  - Nikunj Rana

Lab Shayari

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