आँखों को सपना फिर दिखाया जायगा
फिर से किसी सच को छुपाया जायगा।
ये हब्स है कैसा है क्या है क्या पता
अब मौत पर नक़्शा बनाया जायगा।
दाखिल हुआ हूँ मैं भी तेरे ख़याल में
मेरा भी अब हर ख़याल ज़ाया' जायगा।
अब इश्क़ भी डर के करेगी हर गली
उस का भी इक क़ातिल है जो आ जायगा।
ऐ हज़रत - ए - दिल देख ले ये माजरा
तुझ से नहीं ही कुछ बताया जायगा।
जब तक रहेंगे आइने-खाने में हम
हम को हमीं से ढूंढ़वाया जायगा।
हम बे- सर- ओ -सामान बनके रह गए
ईमाँ बचा है जो चुराया जायगा।
ये गर्दिश - ए - दौरां करेगी क्या मिरा
कल तक इसे भी आजमाया जायगा।















