जो आवाज़ उठाने का दम रखते हैं
वो जीने-मरने का डर कम रखते हैं
ख़ौफ़ नहीं, थोड़ा सा भी हालातों सें
सो सच का दामन था
में हम रखते हैं
अपनापन अब बिल्कुल न बचा लोगों में
सो हम गैरों से मतलब कम रखते हैं
हम ऐसा मातम मना रहे हैं जिस
में
चौबीसों घंटे आँखें नम रखते हैं
तलवार कहाँ-कहाँ उठाएँगे, सो अब
हम हरदम अपने साथ क़लम रखते हैं
— Nikhil Tiwari Nirbhay















