ख़ुद को सब की नज़र से बचाया करो
मेरी ग़ज़लें न तुम गुनगुनाया करो
दिल में जो है तुम्हारे वो कह दो उसे
है मोहब्बत अगर तो जताया करो
चाँद आता है यूँ जिस तरह रात को
तुम भी चोरी छिपे छत पे आया करो
मैं मिला था तुम्हें यार इस बात का
तुम कोई तो निशाँ छोड़ जाया करो
— NISHKARSH AGGARWAL















