'ख़ौफ़ का फेरा'
सारी दुनिया में अँधेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
फ़त्ह बंदूक़ ने पाई है सर-ए-आम अब तो
ख़ौफ़ ने सत्ह बनायी है सर-ए-आम अब तो
घर में मौतों का बसेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
कौन इंसान को इंसान का दुश्मन करता
कौन बारूद बिछा लाशों पे नर्तन करता
दर्द ये किस ने बिखेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
मैं ने कंदील मेरे दिल का जलाया लेकिन
कुछ अँधेरे को उजाले से मिटाया लेकिन
धुँधला धुँधला सा सवेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
आज दुनिया पे हुकूमात हुए ज़ुल्मों के
क़ाबिल-ए-ग़ौर सवालात हुए ज़ुल्मों के
बढ़ता आतंक का डेरा है ख़ुदा ख़ैर करे
हर तरफ़ ख़ौफ़ का फेरा है ख़ुदा ख़ैर करे















