
आबरू तो आबरू है आबरू पर क्या लिखूँ
बस ख़ुदा ही है ये बिल्कुल हू-ब-हू पर क्या लिखूँ
ये मुहब्बत चीज़ ही ऐसी बनी है बा-गज़ब
हर कोई माइल है हर इक आरज़ू पर क्या लिखूँ
— Nityanand Vajpayee
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