देख के मुझको सिहरता है तो हँस देते हैं
वो मुहल्ले से गुज़रता है तो हँस देते हैं
उसने कुछ ख़ास निभाया तो नहीं 'इश्क़ मेरा
यूँँ ही बस बात वो करता है तो हँस देते हैं
ज़ख़्म लाखों हैं मेरे दिल पे उसी ख़ंजर के
फिर भी वो मुझ
में उतरता है तो हँस देते हैं
दर्द वो मेरा दवा तो न मुझे हो पाया
जिस्म में जब भी बिखरता है तो हँस देते हैं
वैसे बदनाम सरेआम मुझे करता वो
फिर भी इस दिल में ठहरता है तो हँस देते हैं
'नित्य' बेदाग़ मेरे 'इश्क़ का परचम है जो
चीथड़ों में भी लहरता है तो हँस देते हैं
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