ख़ुशनुमा थी कभी अपनी तक़दीर भीरखते थे पर्स में उस की तस्वीर भीआदत-ए-क़ैद का ये नतीजा हुआआ गए ले के पिंजरा भी ज़ंजीर भी— Palak Thakur