न जाने उस ने क्या यहाँ गँवाया था
वो आह जिस ने ये मकाँ जलाया था
ये जिस्म मेरे साथ तो रहा मगर
जो छोड़ के गया वो मेरा साया था
जो तुझ से बिछड़ा तो अयाँ हुआ मुझे
मुझे तू कितना मेरे पास लाया था
मैं उस से पूछता रहा पता मिरा
जिसे मैं दर तक अपने ले के आया था
— Paras Angral















