इश्क़ का सावन बना लो
उम्र का बचपन बना लो
कान की बाली नहीं तो
हाथ का कंगन बना लो
या लगा लो दिल मुझी से
या मुझे धड़कन बना लो
दिल अगर घर आप का है
तो मुझे आँगन बना लो
तुम बनो राधा कभी तो
मुझ को भी मोहन बना लो
चाँद की तुम रौशनी हो
रात को रौशन बना लो
जिस्म का हिस्सा नहीं दो
दिल का बस दामन बना लो
— Praveen Bhardwaj















