"तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है!"

गुल है, गुलाब हैं, हर तरफ़ बहार है
ख़िज़ाँ में भी रंगत आई है
ना जाने फिर भी क्यो मायूसी छाई है
तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है

उन की याद आना जैसे साँस लेना है
ये बात जानलेवा है
उन की तस्वीर कुछ ऐसी बसी है
हम ने उन्हें बंद आँखों से पहचान लेना है
यादों ने उन की हमारी बेक़रारी और बढ़ाई है
तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है

यादों में उन की हम रोए जा रहे हैं
बेवजह पलकें भिगोए जा रहे हैं
जो कभी हमारे थे ही नहीं
हम उन के हुए जा रहे हैं
क्या करें, अपनी मौत हमनें ख़ुद बुलाई है
तन्हाई है, तन्हाई है, तन्हाई है

— Pritesh Bunker

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